ईरान की राजधानी तेहरान में छह देशों के संसद सभापतियों की बैठक हुई जिसमें मुख्य रूप से इस बिंदु पर बल दिय गया कि क्षेत्र की शांति व स्थिरता के मामले में बाहरी शक्तियों को हस्तक्षेप का मौक़ा नहीं देना चाहिए।

बैठक में ईरान के अलावा चीन, रूस, तुर्की, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के संसद सभापतियों ने अपने विचार रखे। यह बात समस्त छह देशों के सभापतियों ने संयुक्त रूप से कही कि क्षेत्र की शांति व सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय देशों को आपस में मिलकर काम करना चाहिए बाहरी शक्तियों को इसमें हस्तक्षेप का मौक़ा नहीं देना चाहिए।

अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, सीरिया और लीबिया सहित कई देशों का उदाहरण पेश किया जा सकता है जहां बाहरी शक्तियों विशेष रूप से अमरीका और उसके घटकों ने हस्तक्षेप किया और आतंकवाद को मिटाने के दावे के साथ हमला किया मगर आतंकवाद ख़त्म होने के बजाए बढ़ गया इसलिए आतंकवाद को समाप्त करना अमरीका और उसके घटकों का उद्देश्य ही नहीं था।

इस बीच बाहरी हस्तक्षेप के कारण इन देशों को भारी नुक़सान पहुंच गया और इसका असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ा। वैसे अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ और सीरिया में अमरीका और उसके घटक अपने निहित लक्ष्य भी पूरे नहीं कर पाए क्योंकि इन देशों के परिवर्तनों को देखकर यही लगता है कि वहां के हालात अमरीका की मर्ज़ी की दिशा में नहीं जा रहे हैं।

इन बातों को क्षेत्रीय देश भी भलीभांति महसूस कर रहे हैं। तेहरान में छह देशों के संसद सभापतियों की बैठक में यह बिंदु साफ़ तौर पर नज़र आया कि बाहरी हस्तक्षेप के नुक़सान की ओर से भी देशों का ध्यान केन्द्रित है।

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