ब्लूमबर्ग ने कल रिपोर्ट की है कि सऊदी अरब कई प्रवासी कर्मचारियों पर नकारात्मक प्रभाव डालने के बाद प्रवासी श्रमिकों पर लगाई गई फीस लगाने की अपनी नीति की समीक्षा कर रहा है और देश की बेरोजगारी दर को कम करने का अपना मुख्य उद्देश्य हासिल नहीं किया है.

एजेंसी ने सरकार के मौजूदा विचार-विमर्श से परिचित चार लोगों को उद्धृत करते हुए कहा कि “मजदूरों पर बढ़ती लागत ने देश में आर्थिक दर्द डाला है और प्रवासियों के पलायन में योगदान दिया है।” सऊदी सरकार प्रवासियों पर लगने वाले टैक्स में इजाफा होंने की उम्मीद की जा रही है.

मिडिल ईस्ट मॉनिटर के मुताबिक, सूत्रों में से एक ने कहा, “हालांकि फीस को पूरी तरह से रद्द करने की संभावना नहीं है, लेकिन एक मंत्री समिति उन्हें संशोधित या पुनर्गठन करने की सोच रही है.” सूत्रों ने कहा कि इस मामले पर एक हफ्ते के भीतर एक निर्णय की उम्मीद थी.

यह जानकारी अभी सूत्रों के हवाले से मिली है हालांकि इस जानकारी को सार्वजनिक रूप से अभी तक घोषित नहीं किया गया है. सऊदी सूचना मंत्री, आलद अलवाद ने सरकार के इंटरनेशनल कम्युनिकेशन सेंटर द्वारा आरोप लगाए गए फीस  के बारे में हालिया रिपोर्टों से इंकार कर दिया.

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