बिन सलमान की यात्रा के विरोध का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि सऊदी अरब फिलिस्तीन के मामले में अमेरिका और जायोनी शासन की इच्छा के अनुसार काम रहा है और यह एसा विषय है जिसकी उपेक्षा पश्चिमी संचार माध्यमों ने जानबूझ की है

सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने दो दिसंबर को मोरतानिया और तीन दिसंबर को अलजीरिया की यात्रा की। सऊदी युवराज की दो अफ्रीकी देशों की यात्रा ऐसी स्थिति में हुई जब अर्जेन्टाइना की यात्रा और जी-20 की बैठक में भाग लेने के समय कई रोचक बातें सामने आयीं।

अर्जेटाइना की राजधानी बोइनस आइरस में जी-20 की बैठक में जब मोहम्मद बिन सलमान पहुंचे तो उन्हें खुल्लम- खुल्लम दूसरे देशों के नेताओं की उपेक्षा का सामना हुआ और वह इस बैठक में भाग लेने वाले एक मात्र व्यक्ति थे जो अलग- थलग पड़ गये थे।

मोरतानिया और अलजीरिया की यात्रा भी उन्होंने एसी स्थिति में की जब इस यात्रा के संबंध में स्थिति अस्पष्ट थी और जब उन्होंने इन दोनों देशों की यात्रा की तो यह दिखाने का प्रयास किया कि वह अरब जगत की अलग- थलग पड़ने वाली एकमात्र हस्ती नहीं हैं और जी-20 की बैठक में उनके साथ जो कुछ हुआ वह कुछ दिन बाद भुला दिया जायेगा।

रोचक बात यह है कि सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान के साथ अर्जेन्टाइना में जो कुछ हुआ उसकी भरपाई मोरतानिया और अलजीरिया की यात्रा से न केवल नहीं हो सकता बल्कि उनकी इस यात्रा ने यह दर्शा दिया कि वहां के लोग सऊदी अरब से किस सीमा तक घृणित हैं।

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